नई दिल्ली। भारत में 1950 से 2015 तक 65 वर्षों के अंतराल में बहुसंख्यक हिंदुओं की आबादी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस अवधि में हिंदुओं की हिस्सेदारी में छह फीसदी की गिरावट आ गई है। इसी अवधि में भारत में मुस्लिमों की आबादी में करीब 14.9 फीसदी हो गई है। यही नहीं पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे दूसरे देशों की तुलना करें तो वहां बहुसंख्यक मुस्लिमों की आबादी में हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। यह सच सरकारी अध्ययन में सामने आया है। इससे जुड़े आंकड़े प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की साइट पर उपलब्ध हैं। इसमें 1950 से लेकर 2015 के बीच भारत में जनसांख्यिकी में आए बदलाव के बारे में जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार 1950 में भारत की जनसंख्या में हिंदुओं की हिस्सेदारी 84 फीसदी थी, लेकिन 2015 तक देश की जनसंख्या में हिंदूओं की आबादी में छह फीसदी की गिरावट आ गई और वह 78 फीसदी रह गए है। मुसलमान 1950 में भारत की कुल आबादी के 9.84 फीसदी थे, जो 2015 तक बढ़कर 14.09 प्रतिशत हो गए हैं। म्यांमार के बाद भारत अपने आसपास के देशों में दूसरे नंबर पर है, जिसके बहुसंख्यक समाज की आबादी में कमी आई है।
म्यांमार, नेपाल में भी घटी हिंदू आबादी
रिपोर्ट केअनुसार म्यांमार में इस अवधि में बहुसंख्यक बौद्ध समुदाय की आबादी में हिस्सेदारी 10 फीसदी तक कम हुई है। वहीं भारत में हिंदुओं की आबादी में हिस्सेदारी 6.8 प्रतिशत घट गई है। भारत और म्यांमार के अलावा नेपाल की भी ऐसी ही स्थिति है। नेपाल में बहुसंख्यक हिंदुओं की आबादी में हिस्सेदारी 3.6 फीसदी कम हो गई है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुल 167 देशों का अध्ययन किया है। स्टडी में कहा गया है कि दुनिया के ट्रेंड को देखते हुए भारत में एक स्थिरता पाई गई है। भारत में अल्पसंख्यकों को न सिर्फ संरक्षण प्राप्त है बल्कि उनकी जनसंख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।

पड़ोसी देशों में तेजी से बढ़े मुसलमान
भारत की आबादी में बहुसंख्यक हिंदुओं की भागीदारी घटी है तो वहीं पड़ोसी बांग्लादेश और पाकिस्तान में बहुसंख्यक मुस्लिमों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बांग्लादेश में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 18.5 फीसदी बढ़ गई है। वहीं, पाकिस्तान में 3.75 और अफगानिस्तान में 0.29 फीसदी का इजाफा हुआ है। बौद्ध बहुल भूटान और श्रीलंका में भी बहुसंख्यकों की आबादी में इजाफा हुआ है। भूटान में बहुसंख्यक बौद्धों की आबादी में हिस्सेदारी 65 सालों में 17.6 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि श्रीलंका में यह आंकड़ा 5.25 प्रतिशत का है। (एजेंसी)
