मुरादाबाद, अभिव्यक्ति न्यूज। सनातन समाज में सबसे प्रतिष्ठित माना जाने वाला त्योहार दीपावली अपने साथ पांच पर्व लेकर आता है। धनतेरस से शुरू होने वाले पांचों पर्व यम द्वितीया तक चलते हैं। सनातन शास्त्रों में इन पांच दिनों को यम पंचक कहा गया है। धर्म शास्तों में इन पांच दिनों में यमराज, वैद्यराज धनवंतरि, लक्ष्मी-गणेश, हनुमान जी, मां काली और भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विशेष विधान किया गया है। इस वर्ष अमावस्या की तिथि एक दिन से ज्यादा रहने के कारण पंच दिवसीय दीप पर्व छह दिनों में पूरा होगा।

इस वर्ष 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा धनतेरस पर्व

श्री हरि ज्योतिष संस्थान मुरादाबाद के ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार धनतेरस का त्योहार दीवाली से ठीक दो दिन पहले मनाया जाता है। धनतेरस का नाम ‘धन’ और ‘तेरस’ से बना है। इसमें धन का अर्थ संपत्ति और समृद्धि है और तेरस का अर्थ हिंदू कैलेंडर की 13वीं तिथि है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, साथ ही यह दिन कुबेर और लक्ष्मी माता की पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार धनतरेस का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह तिथि 29 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी। उन्होंने बताया कि त्रयोदशी तिथि का समापन 30 अक्टूबर को दिन में 1 बजकर 15 मिनट पर होगा। इस दिन प्रदोष काल शाम 5 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। धनतेरस के लिए 29 अक्तूबर को गोधूलि काल शाम 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। धनतेरस के पूजन के लिए एक घंटा 42 मिनट का समय रहेगा।

धनतेरस पर सोना-चांदी, गहने और बर्तन खरीदना शुभ

आचार्य पंडित गौरव कौशिक के अनुसार धनतेरस के दिन त्रिपुष्कर योग बन रहा है। इसमें खरीदारी करना शुभ माना जाता है। 29 अक्तूबर को खरीदारी का पूरा दिन मुहूर्त रहेगा। शास्त्रों में धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन, गहने या अन्य कीमती सामान खरीदने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जो भी चीजें खरीदी जाती हैं, वह घर में समृद्धि का आगमन करती हैं। कुछ लोग इस दिन नए वाहन, संपत्ति या अन्य महत्वपूर्ण चीजों की भी खरीदारी करते हैं। इसके साथ ही आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक्स और नए उपकरण धनतेरस पर खरीदना शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित अखिलेश पाण्डेय के अनुसार ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि अगर इस शुभ अवसर पर राशि के अनुसार खरीदारी की जाए तो धन में 13 गुना वृद्धि होती है। धनतेरस खासकर धातु की वस्तुओं की खरीदी के लिए शुभ है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह समृद्धि और सौभाग्य लाता है।

धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार धनतेरस पर सोने और चांदी या बर्तन की खरीदारी करनी चाहिए। इसके साथ ही भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। घर की साफ-सफाई और सजावट करनी चाहिए। वहीं धनतेरस के दिन किसी से न कर्ज लेना चाहिए और न ही कर्ज देना चाहिए। इस दिन अशुद्ध स्थानों पर पूजा नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा

इस वर्ष धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार वर्ष 2024 में धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है –
– कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि शुरू – 29 अक्टूबर 2024, सुबह 10.31
– कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि समाप्त – 30 अक्टूबर 2024, दोपहर 01.15
– पूजा का मुहूर्त – शाम 06.31 बजे से रात 08.13 बजे तक
– यम दीपम का मुहूर्त – शाम 05.38 से शाम 06.55 तक।

धनतेरस पर पूजा का विधान

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार धनतेरस के दिन सुबह घर की साफ-सफाई करने के बाद सूर्योदय से पूर्व स्नान कर साफ या नए वस्त्र पहनें। घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं। अपने कार्यस्थल, दुकान की भी सफाई करें। वंदनवार लगाएं और लक्ष्मी जी के पदचिह्न बनाएं। इसके बाद भगवान धन्वंतरि को कृष्णा तुलसी, गाय का दूध और उससे बने मक्खन का भोग लगाना चाहिए। पीतल की वस्तु खरीदी हो तो जरूर उन्हें भेंट करें। धनवंतरी स्तोत्र का पाठ करें।
ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की षोडोपचार विधि से पूजा करें। कुमकुम, हल्दी, अक्षत, भोग अर्पित करें. उत्तर दिशा में देवताओं की पूजा करें। शुभ मुहूर्त में खरीदारी करें. जो भी खरीदें उसे पहले धनतेरस की पूजा में मां लक्ष्मी को अर्पित करें और फिर अपने इस्तेमाल में लें। शाम को आटे से चौमुखा दीपक बनाकर उसमें सरसों या तिल का तेल डालकर घर के बाहर दक्षिण दिशा में या दहलीज पर रखना चाहिए.

धनतेरस पर यम के नाम दीपदान क्यों करते ?
धनतेरस के दिन शाम शुभ मुहूर्त में यम देव के निमित्त दीपदान किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मृत्यु के देवता यमराज के भय से मुक्ति मिलती है। ये दीपक दक्षिण दिशा में स्थापित करें।
धनतेरस पर पूजा का मंत्र
– धन्वंतरि देव मंत्र – ‘ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः
– कुबेर मंत्र – ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं में देहि दापय।

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