अयोध्या, अभिव्यक्ति न्यूज। अयोध्या में ‘राम की उपस्थिति’ में होने जा रहे पहले दीपोत्सव में विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों और शिक्षकों ने जबरदस्त मेहनत की है। कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल के कुशल नेतृत्व में 30 हजार स्वयंसेवकों ने चार दिन में महज 100 घंटे में 55 घाटों पर 28 लाख दिए बिछा दिए। दीपक बिछाने में 22 समितियों और 55 घाट प्रभारियों समेत 300 से अधिक शिक्षकों ने भी किया योगदान

स्वयंसेवकों को लाने-ले जाने में लगाई गईं 20 से अधिक बसें
अयोध्या में दीपोत्सव में रिकॉर्ड बनाने के लिए रामनगरी के घाटों पर बुधवार शाम एक साथ 28 लाख दिए प्रज्ज्वलित होंगे। दीपोत्सव के इस आयोजन में अवध विश्वविद्यालय और सम्बद्ध महाविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस रिकॉर्ड में 55 घाट प्रभारियों, 22 समितियों के जिम्मेदारों, 14 महाविद्यालयों के साथ 37 इंटर कॉलेज, 40 स्वयंसेवी संस्थाओं का भी योगदान रहा। हर ब्लॉक में 256 दीए बिछाने में स्वयंसेवकों की एक-एक टीम को दो से तीन घंटे लगे। चार दिनों तक चले दीये बिछाने के कार्य में एक लाख 20 हजार से अधिक लंच पैकेट और दो लाख से अधिक पानी की बोतलों का वितरण किया गया जो कि नये रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा स्वयंसेवकों को अयोध्या तक लाने और ले जाने में 20 से अधिक बसों का संचालन कराया गया।
कुलपति ने रोजाना की कार्य की समीक्षा, तैयारियों को लेकर की 200 बैठकें
दीपोत्सव को लेकर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल ने दो माह से 28 अक्टूबर तक लगातार 200 से अधिक बैठकें कीं। उनकी व्यूह रचना का परिणाम रहा कि उनके कार्यकाल के दूसरे दीपोत्सव की सभी तैयारियां बिना किसी रुकावट और विघ्न के पूरी हो गईं। चार दिन तक कुलपति ने तीन चरणों में न सिर्फ काम और तैयारी की समीक्षा की, बल्कि घाटों पर पहुंचकर स्वयंसेवकों और प्रभारियों का उत्साहवर्धन भी किया।
सातवीं बार रिकॉर्ड बनाने को पांच मिनट तक जलते हुए दीपों की ही होगी गिनती
इस बार दीयों में तेल भरने की क्षमता 40 मिलीलीटर से घटाकर 30 मिलीलीटर कर दी गई है। इन्हें जलाने के लिए 91 हजार लीटर सरसों के तेल का इस्तेमाल होगा। 30 अक्टूबर की शाम सूर्य ढलने के साथ सभी घाटों पर एक साथ स्वयंसेवक दीप प्रज्ज्वलित करेंगे। इन सभी दीपों को 30 मिनट में प्रज्ज्वलित करना जरूरी है। इसके बाद पांच मिनट तक जलते दीपों की गिनती होगी। अगर अंतिम पांच मिनट तक एक साथ सभी दीये जलते मिले, तब सातवीं बार विश्व रिकॉर्ड बनेगा।
